चेहरा चाँद का

ऐ चाँद
मेरे हसीन चाँद
कोई ना जान पाया
तेरा असली चेहरा
खूबसूरती की आड़ मे
तू है बाँधे मर्दानगी का सेहरा

देता है तू अपनी आड़ मे
अपने रिश्तेदारों को पनाह
आते है फिर वो झूण्डों मे
परोसने दबी कुचली कराह

भेट करता है तू हर दरिंदों को मौका
जहा लगाते है वो नीचियत को छौका

मृगमरीचिका खूबसूरती से
तू हर सीता को छलता है
इन दुखियारों की बस्ती मे
हर नीच अपनी हाथ सेकता है

मैं बमुश्किल तुझे देख पाया हु
तूने बाकियों वास्ते सफेद धुन्ध जो फैलाया है

ऐ चाँद
मेरे हसीन चाँद
कोई ना जान पाया
तेरा असली चेहरा
खूबसूरती की आड़ मे
तू है बाँधे मर्दानगी का सेहरा

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